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Showing posts from June, 2017

टू लाइनर शेर और पसंदीदा पंगतियाँ ( 21 - 30 )

21. शिकायतें हम से हैं बात-बात पे.. यानी हम से उम्मीदें ज़्यादा हैं..!! 22. कोई पूछे जो हाल, सच तो कह दूँ मगर हर चौखट पर सिसकने का सिला क्या है.. 23. कौन कहता है वक़्त बदला है, पहले रियासतें थी अब सियासतें हैं। 24. उठा जो मीना-ब-दस्त साक़ी रही न कुछ ताब-ए-ज़ब्त बाक़ी तमाम मय-कश पुकार उठ्ठे यहाँ से पहले यहाँ से पहले 25. सीने में धङकता जो हिस्सा है उसी का तो ये सारा किस्सा है 26. बस अब और नही लिखेंगे, ख़्याल अल्फ़ाज़ों से नाराज़ हैं। 27. इश्क कर लीजिए बेइंतेहा किताबो से एक यही ऐसी चीज़ है जो अपनी बातों से पलटा नही करती 28. रोज स्टेटस बदलने से जिंन्दगी नहीं बदलती जिंदगी को बदलने के लिये अपना भी एक स्टेटस होना जरुरी है 29. इश्क़ नहीं है तुमसे, बस मुस्कान की वजह हो तुम। 30. नशा जरूरत नहीं ज़िम्मेदारी है शायद मर्जी के बिना ही हम इसमे शामिल हुए

टू लाइनर शेर और पसंदीदा पंगतियाँ ( 11 - 20 )

11. वो पढ़ते नही अब हमें.. लो, इक वजह बढ़ गई लिखने को.. 12. पसंद तो मै यहां बहुतों को हूँ पर पसंदीदा किसी का नहीं हूं 13. मेरे शब्द किसी वाह वाही के मोहताज़ नहीं अधूरे कलाम है महज किसी खास के लिए 14. आपसे दोस्ती हम यूं ही नही कर बैठे क्या करे हमारी पसंद ही कुछ "ख़ास" है 15. आंखों को सोने दो, ख़्वाब रास्ता तकते होंगे। 16. ज़िन्दगी में कई ऐसे लोग भी मिलते हैं जिन्हें हम पा नहीं सकते सिर्फ चाह सकते हैं 17. सौदा कर देती है रात के हर ख़्वाब का.. ये सुबह सच में बड़ी सयानी है.. 18. I can't give solutions to all of life's problems, doubts, or fears. But I can listen to you and together we will search for answers. 19. मुसाफ़िर ही रहा हूँ हमेशा तुम्हारी नज़र में, ठीक ही है, मंज़िल कब जानती है कि वो मंज़िल है। 20. रख कर हाथ कलम के कंधे पर.. ऊँगलीयों ने सारा सच उगलवा लिया..

टू लाइनर शेर और पसंदीदा पंगतियाँ ( 1 - 10 )

1. पता नहीं अब हक़ है  या नहीं पर आज भी  तेरी परवाह करना अच्छा लगता है 2. बस आखरी बार... इस तरह मिल जाना .... मुझको रख लेना या मुझमें रह जाना ! 3. अगर बिकी तेरी दोस्ती तो पहले खरीददार हम होंगे। तुझे ख़बर ना होगी तेरी कीमत, पर तुझे पाकर सबसे अमीर हम होंगे 4. बीड़ी,सिगरेट,शराब से कही ज्यादा लत लगाई है तुमने इसलिए जाते वक्त किसी और को अपनी जगह देते जाना 5. अब रहेगी शिकायत जिंदगी भर खुद से.. हर उस बात से जिससे तुम नाराज हुए.. 6. गुजर भी रही है और गुजार भी लेंगे.. लेकिन तुम्हारी जगह कोई और नही ले सकता.. 7. किसी अपने को खोने का डर जो होता है... सबसे बड़ा डर होता है वो... 8. काश दर्द का भी तबादला हुआ करता, मैं फरियाद करता खुदा से कि तेरे सिवाय किसी और से दिल लगा दे मेरा 9. ढूंढ के ले आओ कहीं से सुकून मेरा सुना है आजकल इसी शहर में है वो 10. अनवरत सुलगती रही सिगरेट रात भर पैमाने अभी भी कतई खाली नहीं हुए

शायरी ( 1 - 5 )

1 . आज भी वो मुक़ाम न आया.. रात अंधेरी चाँद न आया.. लिख कर तुमको जता न पाया.. इतना पढ़ना भी काम न आया.. माना वो मेरे दोस्त नहीं पर दुश्मनों में भी नाम न आया.. व्हाट्सएप्प, मेसेंजर काम न आया.. कल से उनका पैगाम न आया.. बोरी भर वो सोना लाया.. लेकिन मेरा दाम न आया.. मेरे अंदर जा कर छलके.. ऐसा कोई जाम न आया.. अपना प्यार लुटाया सारा.. लेकिन उनका इक़रार न आया.. उनके कंधे मेरा सिर हो.. ऐसा अब तक दिन न आया.. भगवा पहना तिलक लगाया.. दिल में उसके राम न आया.. 2 . बंधन दो जीवन भर का बंधन का आभास न दो.. मृगतृष्णा हो जाए जीवन ऐसी मुझको प्यास न दो.. क्षणभंगुर है प्यार तुम्हारा तुम ऐसा विश्वास न दो.. सुधापान का अधिकार मुझे दो यूं निर्जल उपवास न दो.. मुटठी भर दे दो अपनापन ये सारा आकाश न दो.. बस कुछ क्षण दे दो अपने लोगों का उपहास न दो.. साथ ना दे प्यार ना दो ग़मो की फहवार न दो.. 3. हँसती हो गालियाँ,सड़क मुस्कुरायें काश  कोई  ऐसा  शहर मिल जाये.. लंबे हो केश, तिल रुस्काए काश कोई ऐसी  नारी मिल जाये.. मधुर हो स्वाद , ...

मेरी नज़्म ( 6 - 10 )

6 . एक परी है जादू भरी आँखों वाली आसमान पे नही ज़मीं पे रहती है बोलती है तो सावन बरसता है चुप होतो दिसम्बर सीझता है बसंत उसके मिज़ाज में रहता है 7 . परी प्रेम की मूरत जैसी चंचल, चतुर चकोर । हंसती गाती पवन हंसनी लाखो दिलो की चोर ।। 8 . दर्द की दलाली में भूल जाता हूँ पीड़ा में दुखती देह, याद रह जाता है उसका देख कर न मुस्कुराना 9 . आसमान में जो पतंगें उड़ती हैं ना, मान लो मेरी ख्वाहिशें हैं। उनमें से एक, सबसे ऊपर दिखेगी। कटी होगी, पर उड़ती दिखेगी। यकीन मानो, वो तुम हो। 10 . शाम हुई है ... लौट आए हैं घर पर सब ... मैं ... वक़्त ... और कुछ ... और कुछ ख्वाहिशें भी ... कुछ ख्वाहिशें भी ...

मेरी नज़्म (1 - 5 )

1 . जब सम्मुख होगे मैं अपलक  तकूँगा तुम्हें निशब्द और तुम्हे सुनाई देगा तुम देख लेना।   मैं भी यहीं रहूँगा   तुम भी यहीं रहोगे। 2 . लाम्पोस्ट की करहाती रोशनी के नीचे गुब्बारे बेच कर कमाई हुई रेज़गारी का बंटवारा करती ज़रूरतों की आंखों में ज़िन्दगी अब भी बाकी है 3 . ज़िन्दगी अब भी बाकी है हाथ से बुनी स्वेटरों की गांठों में बस स्टॉप पे बिकती खीरे की फाहों में और सड़क से दूर कदमों से बनी पहाड़ी राहों में 4 . सूरज को चूम लूँ हवाओं को बाँध लूँ बादलों के गुच्छे गेसुओं में टांक दूँ लचकती शाखों को सीने पे थाम लूँ तुम कहदो आज तो आसमां ज़मीं पे उतार दूँ 5 . कैसी निगोड़ी चांद की पौड़ी खो गई मोरी धड़कन जोड़ी रह गयी बस सिरहन मन का छलियापन नीर कुँवारी प्यास है भारी कौन चलाये दिल पर आरी नैना छलके छन छन #मन_का_छलियापन ~■