शायरी ( 1 - 5 )

1 .
आज भी वो मुक़ाम न आया..
रात अंधेरी चाँद न आया..
लिख कर तुमको जता न पाया..
इतना पढ़ना भी काम न आया..
माना वो मेरे दोस्त नहीं पर
दुश्मनों में भी नाम न आया..
व्हाट्सएप्प, मेसेंजर काम न आया..
कल से उनका पैगाम न आया..
बोरी भर वो सोना लाया..
लेकिन मेरा दाम न आया..
मेरे अंदर जा कर छलके..
ऐसा कोई जाम न आया..
अपना प्यार लुटाया सारा..
लेकिन उनका इक़रार न आया..
उनके कंधे मेरा सिर हो..
ऐसा अब तक दिन न आया..
भगवा पहना तिलक लगाया..
दिल में उसके राम न आया..







2 .
बंधन दो जीवन भर का
बंधन का आभास न दो..
मृगतृष्णा हो जाए जीवन
ऐसी मुझको प्यास न दो..
क्षणभंगुर है प्यार तुम्हारा
तुम ऐसा विश्वास न दो..
सुधापान का अधिकार मुझे दो
यूं निर्जल उपवास न दो..
मुटठी भर दे दो अपनापन
ये सारा आकाश न दो..
बस कुछ क्षण दे दो अपने
लोगों का उपहास न दो..
साथ ना दे प्यार ना दो
ग़मो की फहवार न दो..








3.
हँसती हो गालियाँ,सड़क मुस्कुरायें
काश  कोई  ऐसा  शहर मिल जाये..
लंबे हो केश, तिल रुस्काए
काश कोई ऐसी  नारी मिल जाये..
मधुर हो स्वाद ,  नशा   झुमाये
काश कोई  ऐसी  मय मिल जाये..
प्यासा है  गाँव ,सिमटी  हैं  चाहतें
गर दरिया नहीं  तो नहर मिल जाये..
आग में पानी का असर मिल जाये
काश कोई  ऐसी  खबर मिल जाये..








4 .
क्या करना बयां, मोहब्बत को लफ़्ज़ों मे
हम बस आँखों-आँखों से बता देते है..
सुना है लोगो को हमसे गीले-शिकवे है बहुत
हम ढूंढ ढूंढकर, उनको वफ़ा देते है..
वो सारा दिन ICH मे बैठे रहते है
उनकी नब्ज टटोलकर, हम दवा देते है..
प्यार की दौड़ मे हम रहे सबसे आगे
फिर भी लोग, तन्हाई की सजा देते है..
नफरत के सौदे मे, वो हारी है बहुत
खर्च महोब्बत कर, हम नफा देते है..







5.
कोई जब तुमको देख लेगा
चाँद सितारे उसको पुराने लगेंगे..
तुम ना आओ मिलने कोई बात नहीं
हम ख्वाबो मे आ आ के सताने लगेंगे..
यूँ तो गुजर रहे है दिन रात चाहतो मे
कल ये सब अफसाने लगेंगे..
खर्च हो जाते हो रोज फ़िज़ूल ही तुम
होना जब हम कमाने लगेंगे..
बना फिरता है डोबलक.. परवीन साकिर
साकिर बनने मे अभी ज़माने लगेंगे..
अभी हँस कर टाल देते हो तुम
कुछ समय बाद ये अल्फ़ाज़ सयाने लगेंगे..
फेसबुक,व्हाट्सअप तलाशते रह जाओगे
जब तुमको हम याद आने लगेंगे..
हमारे प्यार का खुमार इस कदर छायेगा तुमपे
पक्के आम भी कच्चे नजर आने लगेंगे..


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