उस्तादों की कलम से...

1.
हम उस की ख़ातिर बचा न पाएँगे उम्र अपनी... फ़ुज़ूल-ख़र्ची की हम को आदत सी हो गई है...



2.
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी..
बड़ा बे-अदब हूँ सज़ा चाहता हूँ...


3.
दिल ना उम्मीद तो नहीं,नाकाम ही तो हैं...
लंबी हैं गम की श्याम मगर श्याम ही तो हैं...




4.
अंगड़ाई भी वो लेने  पाए उठा के हाथ...


देखा जो मुझ को छोड़ दिए मुस्कुरा के हाथ...


5.
यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है... हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है...


6.
तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं... एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं...


7. दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ... बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ...


8.
ग़ज़ब किया तेरे वादे पे ऐतबार किया... तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया...


9. "अजब हाल है, तबियत का इन दिनो, ख़ुशी ख़ुशी नहीं लगती और गम बुरा नहीं लगता !"



10.
ऐ अक़्ल नहीं आएँगे बातों में तिरी हम... नादान थे नादान हैं नादान रहेंगे...


11.
कौन ये ले रहा है अंगड़ाई
आसमानों को नींद आती है...



12. दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं
दोस्तों की मेहरबानी चाहिए...



13.पर्दा नहीं जब कोई खुदा से बन्दों से पर्दा करना क्या जब प्यार किया तो डरना क्या



  • कभू रोना कभू हँसना कभू हैरान हो जाना
    मोहब्बत क्या भले-चंगे को दीवाना बनाती है

    ख़्वाजा मीर 'दर्द'

  • गुज़री सियाहकारी में या रब तमाम उम्र
    आधी शबाब में कटी आधी ख़िज़ाब में

    अज्ञात

  • एक आदत सी बन गई है तू
    और आदत कभी नहीं जाती

    दुष्यंत कुमार

  • झूट बोला है तो क़ाएम भी रहो उस पर 'ज़फ़र'
    आदमी को साहब-ए-किरदार होना चाहिए

    ज़फ़र इक़बाल

  • बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
    होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे

    मिर्ज़ा ग़ालिब

  • भेज दी तस्वीर अपनी उन को ये लिख कर 'शकील'
    आप की मर्ज़ी है चाहे जिस नज़र से देखिए

    शकील बदायुनी

  • रफ़ीक़ों से रक़ीब अच्छे जो जल कर नाम लेते हैं
    गुलों से ख़ार बेहतर हैं जो दामन थाम लेते हैं

    अज्ञात

  • मुझ को तो होश नहीं तुम को ख़बर हो शायद
    लोग कहते हैं कि तुम ने मुझे बर्बाद किया

    जोश मलीहाबादी

  • कैसे कैसे ऐसे वैसे हो गए
    ऐसे वैसे कैसे कैसे हो गए

    नज़ीर दहक़ानी

  • कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
    आज तुम याद बे-हिसाब आए

    फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • मैं जाता हूँ दिल को तिरे पास छोड़े
    मिरी याद तुझ को दिलाता रहेगा




14. घड़ी की टिक टिक को मामूली न समझिये बस यूँ समझ लीजिये जिंदगी के पेड़ पर कुल्हाड़ी के वार है

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