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उस्तादों की कलम से...

1. हम उस की ख़ातिर बचा न पाएँगे उम्र अपनी... फ़ुज़ूल-ख़र्ची की हम को आदत सी हो गई है... 2. भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी.. बड़ा बे-अदब हूँ सज़ा चाहता हूँ... 3. दिल ना उम्मीद तो नहीं,नाकाम ही तो हैं... लंबी हैं गम की श्याम मगर श्याम ही तो हैं... 4. अंगड़ाई   भी   वो   लेने   न   पाए   उठा   के   हाथ... देखा   जो   मुझ   को   छोड़   दिए   मुस्कुरा   के   हाथ... 5. यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है... हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है... 6. तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं... एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं... 7. दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ... बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ... 8. ग़ज़ब किया तेरे वादे पे ऐतबार किया... तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया... 9. "अजब हाल है, तबियत का इन दिनो, ख़ुशी ख़ुशी नहीं लगती और गम बुरा नहीं लगता !" 10. ऐ अक़्ल नहीं आएँगे बातों में तिरी हम... नादान थे नादान हैं नादान र हेंगे... 11. कौन ये ले र...