मेरी नज़्म ( 6 - 10 )

6 .
एक परी है
जादू भरी आँखों वाली
आसमान पे नही ज़मीं पे रहती है
बोलती है तो सावन बरसता है
चुप होतो दिसम्बर सीझता है
बसंत उसके मिज़ाज में रहता है



7 .
परी प्रेम की मूरत जैसी
चंचल, चतुर चकोर ।
हंसती गाती पवन हंसनी
लाखो दिलो की चोर ।।



8 .
दर्द की दलाली में
भूल जाता हूँ
पीड़ा में दुखती देह,
याद रह जाता है
उसका
देख कर न मुस्कुराना



9 .
आसमान में जो पतंगें उड़ती हैं ना,
मान लो मेरी ख्वाहिशें हैं।
उनमें से एक,
सबसे ऊपर दिखेगी।
कटी होगी,
पर उड़ती दिखेगी।
यकीन मानो,
वो तुम हो।


10 .
शाम हुई है ...
लौट आए हैं घर पर सब ...
मैं ...
वक़्त ...
और कुछ ...
और कुछ ख्वाहिशें भी ...
कुछ ख्वाहिशें भी ...

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