मेरी नज़्म (1 - 5 )

1 .
जब सम्मुख होगे
मैं अपलक 
तकूँगा तुम्हें निशब्द
और तुम्हे सुनाई देगा
तुम देख लेना।  
मैं भी यहीं रहूँगा  
तुम भी यहीं रहोगे।



2 .
लाम्पोस्ट की
करहाती रोशनी के नीचे
गुब्बारे बेच कर
कमाई हुई रेज़गारी
का बंटवारा करती
ज़रूरतों की आंखों में
ज़िन्दगी
अब भी बाकी है

3 .
ज़िन्दगी
अब भी बाकी है
हाथ से बुनी स्वेटरों
की गांठों में
बस स्टॉप पे बिकती
खीरे की फाहों में
और
सड़क से दूर
कदमों से बनी पहाड़ी राहों में


4 .
सूरज को चूम लूँ
हवाओं को बाँध लूँ
बादलों के गुच्छे
गेसुओं में टांक दूँ
लचकती शाखों को
सीने पे थाम लूँ
तुम कहदो आज तो
आसमां ज़मीं पे उतार दूँ


5 .
कैसी निगोड़ी
चांद की पौड़ी
खो गई मोरी
धड़कन जोड़ी
रह गयी बस सिरहन
मन का छलियापन
नीर कुँवारी
प्यास है भारी
कौन चलाये
दिल पर आरी
नैना छलके छन छन
#मन_का_छलियापन
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